قوله: (محجورًا عليه) أي: بأن ضاق ماله عن ديونه، فسأل غرماؤه الحاكم الحجْر عليه، فحجر عليه. قوله: (ربُّ دينٍ) أي: دين معاملة. قوله: (بعد موته) أي: في تركه مكاتب. قوله: (والكتابة) أي: الصحيحة. قوله: (عقد لازم) أي: من الطرفين، لأنها بيع. قوله: (ولا حجر عليه) أي: لسفه أو فلس كبقية العقود اللازمة. قوله: (مقامه) أي: السيد من ولي وغيره. قوله: (فلسيده الفسخ) كما لو أعسر مشتر بالثمن قبل دفعه. قوله: (ويلزم إنظاره) أي: