قوله: (إلا إن تحيل) بأن قصد أخذه بعد تحلله من إحرام يحدثه. قوله: (كله) أي: ما صاده، أو دل، أو اعان عليه، أو أشار إليه ونحوه. "شرح". قوله: (الجزاء) أي: لمالكه. قوله: (أو صيد له) أي: أو ذبح. قوله: (وإن نقل بيض صيد) ولو عن فراشه برفق ففسد، ضمنه. قوله: (إلا من بيض النعام) يعني: فيضمنه مطلقاً. قوله: (أو حلب صيداً) أي: ولو بعد حله، كحلال حلب صيد حرم بعد إخراجه. قوله: (مكانه) أي: مكان الإتلاف.